ब्रेकिंग न्यूज़ सिद्धार्थनगर
प्रवीण दूबे
ब्यूरो चीफ गोरखपुर
नेशनल हाइवे के किनारे शहर में हुसैनगंज में लगे बोर्ड पर डॉ. ज्योत्सना का नाम।
-प्रभारी प्राचार्य ने दो निजी अस्पतालों और सरकारी डॉक्टरों को पत्र लिखकर मांगा जवाब, सीएमओ को भी दी जानकारी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के कई डॉक्टर नाम छिपाकर निजी अस्पतालों में मरीज देख रहे हैं। इन अस्पतालों में न केवल इनके अधूरे नाम के बोर्ड लगे हैं, बल्कि प्रमुख कस्बों और सड़कों के किनारे भी सूचना पट टांगे गए हैं। सरकारी डॉक्टरों के निजी अस्पतालों में मरीज देखने, ऑपरेशन व जांच करने की जानकारी होने पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इन्हें पत्र लिखकर जानकारी मांगी है।
मेडिकल कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. एके झा ने शहर के दो नर्सिंग होम और तीन डॉक्टरों को पत्र लिखा है। संबंधित डॉक्टरों से पूछा है कि निजी अस्पताल के बोर्ड में जिस डॉक्टर का नाम लिखा है, क्या उनका है? या कोई और है? निजी अस्पताल के बोर्ड पर उनकी अनुमति से प्रचार प्रसार हो रहा है या इस मामले में आपको जानकारी नहीं है?
इसी तरह के सवाल निजी अस्पतालों से किए गए। मसलन जिस डॉक्टर का नाम आपने बोर्ड में इस्तेमाल किया क्या वह मेडिकल कॉलेज में कार्यरत हैं? यह मामला चर्चा में आया तो दोनों निजी अस्पतालों ने मेडिकल कॉलेज के रजिस्टर्ड पत्र को प्राप्त नहीं किया। वे पत्र वापस मेडिकल कॉलेज के कार्यालय में आ गए हैं। इन्हें फिर भेजा जा रहा है। प्रभारी प्राचार्य ने सीएमओ डॉ. बीके अग्रवाल को भी पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी है। कहा है कि जांच में सहयोग कर बताएं कि ये डॉक्टर कौन हैं
ये डॉक्टर हैं कौन? इसलिए उठा सवाल
उसका रोड स्थित एक हॉस्पिटल में डॉ. प्रतिभा का बोर्ड लगा है। नाम के नीचे डिग्री और अनुभव लिखा भी है, लेकिन मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर होने का जिक्र नहीं है। मगर अस्पताल में यही बताया जाता है कि वे मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर हैं। हकीकत ये है कि मेडिकल कॉलेज में डॉ. प्रतिभा यादव स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। मरीज भी भ्रम में पड़ जाते हैं कि डॉ. प्रतिभा मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर हैं या कोई और।
इसी तरह अलीगढ़वा व उसका रोड पर सड़कों के किनारे लगे निजी अस्पताल के बोर्ड पर डॉ. ज्योत्सना दुबे का भी नाम है। डॉ. ज्योत्सना मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसुति रोग विभाग में असिस्टेंट प्रोफसर हैं। इसी प्रकार सीनियर रेजीडेंट महिला के बोर्ड भी शहर में लगे हुए हैं।
मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी डिपार्टमेंट की असिस्टेंट प्रोफेसर के एक निजी पैथोलॉजी में नियमित जांच करने की चर्चा है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों के पर्चे के पीछे जिस अल्ट्रासाउंड सेंटर का नाम लिखा जा रहा है, वह भी एक सीनियर रेजीडेंट का है। इनके अलावा अन्य डॉक्टर भी निजी अस्पतालों में इलाज कर रहे हैं, लेकिन वे चोरी छिपे ही कर रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी के 50 में से 25 पद रिक्त हैं। 25 पदों में 10 डॉक्टर ही सरकारी हैं। इन्हें नॉन प्रैक्टिस एलाउंस मिलता है। जिन डॉक्टरों को एनपीए मिलता है, उनका निजी अस्पताल में प्रैक्टिस करना नियम विरूद्ध है। कॉलेज में सीनियर रेजीडेंट 20 और जूनियर रेजीडेंट 40 हैं।
जन प्रतिनिधियों व अधिकारियों के माध्यम से शिकायत मिली थी कि निजी नर्सिंग होम के संचालक मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के नाम के साथ प्रचार प्रसार कर रहे हैं। संबंधित डॉक्टरों व निजी अस्पतालों को पत्र लिखा गया है। उनके जवाब प्राप्त होने पर कार्रवाई की जाएगी। संविदा पर नियुक्त होने वाले डॉक्टर प्रैक्टिस कर सकते हैं।
- डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य सिद्धार्थनगर
प्रवीण दूबे
ब्यूरो चीफ गोरखपुर

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