राजेश कुमार यादव की कलम से
Knights Templar: देश की सीमाओं पर डटे सैनिकों के साहस और पराक्रम की कल्पना करना भी सामान्य व्यक्ति के लिए थोड़ा मुश्किल है. सैनिक देश की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान करने में भी नहीं हिचकिचाते हैं. रूस यूक्रेन के बीच चल रही जंग में दोनों तरफ के सैनिक पूरी बहादुरी के साथ लंबे समय से डटे हैं. दुनियाभर में बहुत से सैनिकों के जत्थों को उनके शौर्य के लिए आज भी याद किया जाता है. दुनियाभर में एक समय तक देश की रक्षा से बढ़कर धर्म की रक्षा के लिए लाखों-करोड़ों शूरवीरों ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए. ऐसे ही योद्धाओं में सबसे ऊपर नाम आता है नाइट्स टेम्पलर का.
नाइट्स टेम्पलर की गिनती इतिहास के सबसे खूंखार योद्धाओं में की जाती है. ये योद्धा समय के साथ काफी ताकतवर और अमीर होते गए. एक समय ऐसा भी आया, जब नाइट्स टेम्पलर ने शासकों की तो छोड़ दें, पोप की अपील को भी नजरअंदाज कर दिया था. यहीं से शुरू हुई इन रहस्मयी शक्तिशाली योद्धाओं के अंत की कहानी. इन योद्धाओं की दुस्साहसी कहानियों के कारण सदियों तक इतिहासकारों की नींद उड़ी रही. इतिहासकार इनके बारे में नई-नई जानकारियां जुटाते रहे. आज हम आपको इन्हीं योद्धाओं के उदय और अंत की कहानी बता रहे हैं.
लुटेरों से निपटने के लिए फ्रांस के ह्यूग्स डी पेइंस ने साल 1118 में एक सेना बनाई. इसे ‘पुअर फेलो-सोलजर्स ऑफ क्राइस्ट’ नाम दिया गया.
कौन थे नाइट्स टेम्पलर?
दुनियाभर में एक समय तक सेनाएं धर्म की रक्षा के लिए आपस में भिड़ रही थीं ऐसे ही धर्मयुद्ध के दौरान साल 1099 में ईसाई सेनाओं ने यरूशलम को मुस्लिमों से आजाद कर लिया था. इसके बाद यरूशलम में ईसाई शासकों का राज शुरू हो गया था. फिर पश्चिमी यूरोप के तीर्थयात्रियों ने भी यरूशलम की यात्रा करना शुरू कर दिया था. हालांकि, जब भी ईसाई तीर्थयात्री मुस्लिमों के शासन वाली जगहों से गुजरते थे तो लूटपाट का शिकार हो जाते थे. इन्हीं लुटेरों से निपटने के लिए फ्रांस के ह्यूग्स डी पेइंस ने साल 1118 में एक सेना बनाई. इतिहासकारों के मुताबिक, पहले इसे ‘पुअर फेलो-सोलजर्स ऑफ क्राइस्ट’ और ‘टेम्पल ऑफ सोलोमन’ नाम दिया गया.
क्या था इन योद्धाओं का काम?
इतिहास के सबसे खूंखार इन योद्धाओं का काम यरूशलम की यात्रा पर जाने वाले लोगों को सुरक्षा मुहैया कराना था. हालांकि, उनका साहस और वीरता देखते हुए उनकी जिम्मेदारियों में बढ़ोतरी होती हरी. धीरे-धीरे नाइट्स टेम्पलर यरुशलम के क्रूसेडर राज्यों के रक्षक बन गए. उन्हें ऐसे योद्धाओं के तौर पर पहचान मिली, जो कभी हारते ही नहीं थे. यरूशलम के शासक बाल्डविन द्वितीय ने टेम्पल माउंट में मुख्यालय बनाने की मंजूरी दी. इसके बाद से ही ये योद्धा नाइट्स टेम्पलर कहलाए जाने लगे. नाइट्स टेम्पलर ने मुस्लिम सेनाओं के खिलाफ कई जंग लड़ीं और जीतीं.
यरूशलम के शासक बाल्डविन द्वितीय ने टेम्पल माउंट में मुख्यालय बनाने की मंजूरी दी. (Image: Social Media)
कब शुरू हुआ नाइट्स टेम्पलर का बुरा वक्त?
नाइट्स टेम्पलर एक समय बहुत अमीर और ताकतवर हो गए. उन्हें पीछे नहीं हटने और आत्मसमर्पण नहीं करने वाले खूंखार योद्धाओं के तौर पर पहचान मिली. नाइट्स टेम्पलर के योद्धाओं ने इस क्रम में अपने कई गढ़ बनाए. हालांकि, 12वीं सदी में मुस्लिम सेनाओं ने फिर यरुशलम पर कब्जा कर लिया. इससे धर्मयुद्ध की पूरी दिशा ही बदल गई. यही से नाइट्स टेम्पलर का बुरा वक्त शुरू हो गया. उन्हें बार-बार अपनी जगह बदलनी पड़ी. उनके लिए ये बुरा दौर लंबा चला. उनके सैन्य अभियानों को यूरोपीय देशों की ओर से समर्थन में कमी आने लगी. साल 1303 तक तो मुस्लिमों के शासन में उनकी साख पूरी तरह खत्म हो गई.
कैसे हुआ नाइट्स टेम्पलर का अंत?
मुस्लिमों के शासन वाले इलाकों में साख खत्म होने के बाद नाइट्स टेम्पलर को पेरिस का रुख करना पड़ा. हालांकि, तब तक उनकी रहस्मयी दुनिया, जबरदस्त ताकत और अमीरी फ्रांस के राजा के लिए भी बड़ी चुनौती बन गई थी. उन्होंने अपने बुरे दौर में भी राजा तो छोड़ ही दें, पोप की अपील को भी नजरअंदाज कर दिया. बाद में उनका यही रवैया यही उनकी बर्बादी का कारण बना. नाइट्स टेम्पलर के मुखिया मास्टर जैक्स दी मॉले पोप से मिलने फ्रांस आए. इसके बाद उन्हें राजा को कर्ज देने से इनकार करने के कारण 1307 में नाइट्स टेम्पलर के सदस्यों को बंदी बना लिया गया. पूरे फ्रांस में नाइट्स टेम्पलर को बंदी बनाकर मुकदमे चलाए गए. इतिहास में इन्हें ‘ट्रायल्स ऑफ द नाइट्स टेम्पलर’ कहा गया. फ्रांस के राजा फिलिप चतुर्थ ने इन्हें खत्म करने का आदेश दिया. काफी नाइट्स टेम्पलर को जलाकर मारकर दिया गया.
कहां गया नाइट्स टेम्पलर का खजाना?
नाइट्स टेम्पलर का खजाना पूरी दुनिया के लिए आज भी रहस्य बना हुआ है. जब उन्हें ईसाई तीर्थस्थलों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा दिया गया तो इस सेना को कई टन सोना, कीमती हीरे-जवाहरात और रत्न दान में दिए गए थे. यही नहीं, इस सेना को तीर्थस्थलों की सुरक्षा करने के दौरान भी यरूशलम में बड़ा खजाना मिला था. नाइट्स टेम्पलर ने दान में मिले खजाने के साथ ही यरूशलम में मिले खजाने को किसी सुरक्षित ठिकाने पर छुपा दिया. नाइट्स टेम्पलर के अंत के बाद फ्रांस के शासकों और बाद में खजाने की खोज करने वालों ने इस अरबों के खजाने को खोजने की बहुत कोशिश की, लेकिन ये किसी के हाथ नहीं लगा.

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